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Getting things done part 5

Doing: Making the Best Action


Choices अपने टास्क को organize करना बहुत इम्पोर्टेन्ट होता है. ये आपको अपने अधूरे काम के बारे में चिंता किए बिना शांति से बैठकर काम पर फोकस करने में मदद करती है. अधूरे काम हमेशा चिंता और ध्यान भटकाने का कारण बनते हैं और ये तब तक आपको परेशान करते रहेंगे जब तक आपके पास एक ऐसा सिस्टम नहीं होता जहां आप उसे पूरा करने के बारे में प्लान नहीं करते. जब आप अपना सारा काम एक जगह इकट्ठा कर लेते हैं तो आपको उन्हें अलग-अलग केटेगरी में डिवाइड करना है. इस केटेगरी में आपके प्रोजेक्ट, कैलेंडर इवेंट, अगले एक्शन की लिस्ट, वेटिंग लिस्ट और someday लिस्ट यानी किसी और दिन करने वाली लिस्ट शामिल हैं.

आपके प्रोजेक्ट लिस्ट में वो सभी टास्क शामिल होते हैं जिन्हें पूरा करने के लिए एक से ज़्यादा स्टेप्स की ज़रुरत होती है.आपके कैलेंडर में वो सभी टास्क लिखे जाने चाहिए जिन्हें आपको एक ख़ास तारीख को ही परा करना है. आपकी एक्शन लिस्ट में उस काम को लिखा जाएगा जिसके लिए आपको एक्शन लेने की ज़रुरत है. बाकी सभी लिस्ट के लिए आप एक फ़ोल्डर, planner या कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

आप जो भी इस्तेमाल करने का फ़ैसला करते हैं, आपको बस इतना ध्यान रखना होगा कि आपको हर केटेगरी को एक दूसरे से अलग रखना है. इसका मतलब है कि आप एक ही टास्क को दो केटेगरी में नहीं लिख सकते. अगर आपने ऐसा किया तो ये सिर्फ़ आपको कंफ्यूज करेगा और आपको लगेगा कि इस सिस्टम में ही कोई गड़बड़ी है.

एग्जांपल के लिए, एक्शन लिस्ट को लेते हैं. इस लिस्ट में वो सभी काम शामिल होने चाहिए जिन्हें एक बार में ही पूरा करने की ज़रुरत है जैसे घर के काम, फोन कॉल करना, कंप्यूटर पर किए जाने वाले काम वगैरह.

हर काम को केटेगरी में बॉट कर आप समय और मेहनत दोनों को बचाते हैं. एग्ज़ाम्पल के लिए, जब आप उन सभी टास्क को एक फ़ोल्डर में डालते हैं जिनके लिए कंप्यूटर की ज़रुरत है, तो जब भी आपको कंप्यूटर पर काम करने का समय मिले तो आप उस फ़ोल्डर को खोलकर अपना काम तुरंत शुरू कर सकते हैं. आपको अपना सारा काम एक बार में ही मिल जाएगा. इस तरह आप कभी भी किसी भी काम के बारे में भूलेंगे नहीं.

केटेगरी बनाने के बाद भी आप टास्क को छोटे छोटे केटेगरी, जिन्हें sub category कहा जाता है, उसमें बाँट सकते हैं. जैसे अपने कंप्यूटर टास्क के लिए आप ऑनलाइन और ऑनलाइन टेस्ट के दो छोटे केटेगरी बना सकते हैं. ये केटेगरी काम करना बहुत आसान बना देते हैं.

इमेजिन कीजिए कि आप travel कर रहे हैं और उस वक़्त आपके पास इंटरनेट की सुविधा मौजूद नहीं है, तो फ्लाइट में बैठे-बैठे आप अपने ऑनलाइन टास्क को पूरा कर सकते हैं.हर चीज़ को केटेगरी में बांटने से आपको आर्गनाइज्ड होने में मदद मिलेगी, आप कभी भी कोई इम्पोर्टेन्ट काम भूलेंगे नहीं. तब आप स्टेस महसस नहीं करेंगे क्योंकि तब आपकी बिजी लाइफ आपके कंट्रोल में होगी. 

कॉन्क्लूज़न


क्योंकि समय तेज़ी से बदल रहा है इसलिए हमारे जॉब के बारे में भी ठीक से कुछ कहा नहीं जा सकता. आज भी दिन में 24 घंटे का वक़्त ही मिलता है लेकिन काम का लोड इतना बढ़ गया है कि ये वक़्त भी कम पड़ने लगा है. देखिए हम समय को तो नहीं बढ़ा सकते लेकिन स्मार्टली काम कर कम समय में ज़्यादा काम पूरा ज़रूर कर सकते हैं. आजकल जब आप कोई जॉब ज्वाइन करते हैं तो आपसे ये उम्मीद की जाती है कि आपको अपना टारगेट पूरा करना है लेकिन अक्सर ये समझ ही नहीं आता कि आखिर आपकी ज़िम्मेदारियाँ हैं क्या. हर नया दिन पहले दिन से ज़्यादा मुश्किल लगने लगता है. दिन-ब-दिन हमारे काम की लिस्ट लंबी होती जा रही है और हमारा दिन इसी उलझन में बीत जाता है कि काम को पूरा करें तो कैसे करें.

ये बुक इन सभी प्रोबलम्स के solution के रूप में सामने आई है. अपने organizing मेथड से इसने कई सक्सेसफुल लोगों की जिंदगी को बदला है. इस बुक में आपने सीखा कि जिंदगी में नई ज़िम्मेदारियों का सामना कैसे करें. आपने समझा कि अपने लाइफ में सब कुछ organize कर के आप कम समय में अच्छे से फोकस कर ज़्यादा काम कर सकते हैं.

आपने फिजिकल और मेंटल तरीके से चीज़ों को इकट्ठा करने के बारे में जाना. एक बार जब आपके पास एक ऐसा organizing सिस्टम होता है जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं, तो बाकी सब कुछ आसान हो जाता है. तब आप बेफ़िक्र होकर अपने काम पर फोकस कर सकते हैं क्योंकि आप जानते हैं कि आपने हर चीज़ को ठीक से मैनेज कर लिया है. इसलिए चिल करें और अपने हार्ड वर्क से आप जो कुछ अचीव करते हैं उसे खुलकर एन्जॉय करें और याद रखें आपको ज़्यादा देर तक काम नहीं करना है बल्कि स्मार्ट तरीके से कम समय में ज़्यादा काम करना है.

आपको ये बुक कैसी लगी, कमेंट करके जरूर बताएं।
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2015 edition  Getting Things Done 
Updated edition


Getting things done part 4

Getting Started: Setting Up the Time, Space, and Tools


कभी-कभी लाइफ में कुछ सिंपल ट्रिक्स अपना लेने से लाइफ हमेशा के लिए बदल जाती है. ज़्यादातर सक्सेसफुल लोगों ने एक्स्ट्राऑर्डिनरी सक्सेस पाने के लिए कोई ना कोई तरकीब अपनाई है. अपने माइंड को क्लियर कर बेहतर परफॉरमेंस के लिए, आपको अपने लाइफ पर कंट्रोल रखना होगा और इसके लिए आपको सही समय, जगह और टूल्स की ज़रुरत होगी. टाइम से हमारा मतलब है कि आपको कम से कम दो दिन अलग रखने होंगे. इस प्रोसेस को शुरू करने के लिए आप वीकेंड या छुट्टी का दिन चुन सकते हैं. ये प्रोसेस सुनने में आपको लंबा लग सकता है लेकिन इसका रिजल्ट आपको तुरंत मिलेगा. जगह का मतलब है कि आपके पास आपकी एक पर्सनल डेस्क होनी चाहिए जहां आप अपने काम को लिख कर उसे organize कर सकें. यहाँ तक कि अगर आपके ऑफिस में आपका केबिन है तब भी घर पर आपको अपना डेस्क सेट करना होगा. 
टूल्स का मतलब है वो सामान का यूज़ आप अपने आईडिया और विचारों को प्रोसेस करने में और उन्हें सही फ़ोल्डर में organize करने के लिए करते हैं. कंप्यूटर, पेपर ट्रे, स्टेपलर, कैलेंडर, पेंसिल ये सब टूल्स हैं जिनकी आपको ज़रुरत पड़ेगी. इनमें से कौन कौन सा टूल आपको रखना है वो आपकी मर्जी है. आप अपनी पसंद से अपना डेस्क सजा सकते हैं.

बस इतना याद रखें कि हम एक ऐसी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं जहां आप अपने मन को हर तरह के भटकाव से ख़ाली रख सकें. इसलिए अपने गोल तक पहुँचने के लिए सही समय और सही जगह का होना बहुत ज़रूरी है.

आइए इन टूल्स के बारे में समझते हैं. किसी भी आर्गेनाईजेशनल सिस्टम के लिए एक कैलेंडर को रेडी होना बहुत ज़रूरी होता है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सा कैलेंडर लेना चाहिए सिर्फ़ आपको उसे ठीक से यूज़ करना आना चाहिए. अपने कैलेंडर का इस्तेमाल उन अधूरे टास्क के बारे में लिखने के लिए ना करें जिन्हें आप कभी दोबारा चेक नहीं करने वाले हैं. इससे आपको सिर्फ़ यही लगेगा कि ये सिस्टम काम नहीं करता है और ये भी हो सकता है कि आप इस प्रोसेस को फॉलो करना ही बंद कर दें.

कैलेंडर का काम होता है किसी ख़ास काम के बारे में याद दिलाना, कोई ऐसा काम जिसे किसी ख़ास तारीख़ को करना बहुत ज़रूरी है जैसे कि डॉक्टर का अपॉइंटमेंट या कोई सेमिनार अटेंड करना. हो सकता है कि आप ख़ुद को आर्गनाइज्ड रखने के लिए किसी सॉफ्टवेयर या फ़ाइल की हार्ड कॉपी रखना पसंद करते हों, तो इसमें कोई हर्ज नहीं है, सिर्फ इतना ध्यान रखें कि कोई भी टूल अकेला काम नहीं कर सकता. एक स्ट्रोंग organizing सिस्टम बनाने के लिए जो सच में काम करता हो, आपको कई टूल्स को मिलाकर अलग-अलग ट्रिक्स को यूज़ करना होगा.

Collection: Corralling Your "Stuff"

अब आपके पास अपना डेस्क है जिस पर वो सभी टूल्स मौजूद हैं जिनकी आपको organizing प्रोसेस में ज़रुरत पड़ सकती है.

अब आप अपना काम शुरू कर सकते हैं. सबसे पहले आपको वो सारा सामान इकट्ठा

करना होगा जिसे organize करने की ज़रुरत है. आपको कितनी चीज़ों को छांटना है उसके हिसाब से इस प्रोसेस में 2 से 6 घंटे लग सकते हैं. आपको अपने घर के हर रूम और drawer में चेक करना होगा. पहले, आपको फिजिकली सारा सामान इकट्ठा करना है. कोई भी ऐसी चीज़ जिसकी कोई परमानेंट जगह नहीं है और वो इधर उधर बिखरी हुई है, उसे आपको ठीक से देखना और प्रोसेस करना होगा इसलिए इसे अपने "in-basket" में डालें.

दूसरा, आपको मेंटली सारी चीजें इकट्ठा करनी हैं. आपको पेपर पर अपने सारे आईडिया और थॉट लिखने होंगे. अपने हर आईडिया को लिखकर in-basket में रखना सबसे अच्छा तरीका होता है. आपको ऐसे कई आईडिया और प्रोजेक्ट मिलेंगे जिन्हें आप करना तो चाहते थे लेकिन उन्हें करने का कभी समय ही नहीं मिला.
हम सभी अक्सर अपने drawer में कई चीजें छोड़ देते हैं और फ़िर उन्हें कभी नहीं उठाते. अक्सर drawer में फ़ाइल, बिज़नेस कार्ड, पेन वगैरह होते हैं इसलिए आपको हर आइटम को ठीक से चेक करना होगा. हर बिजनेस कार्ड और नोट को चेक करें. जब आपको लगे कि कोई चीज़ काम की है तो उसे in-basket में रख दें. मेंटली चीज़ों को इकट्ठा करना कोई पर्सनल या प्रोफेशनल आईडिया हो सकता है. हो सकता है कि आपको अपना garage साफ़ करना हो, किसी को फ़ोन करना हो या अपने ईमेल में बेकार की चीजें डिलीट करनी हो. सब कुछ इकट्ठा करने के बाद, सामान का एक बड़ा ढेर लगा होगा. जब आप सारा सामान देखते हैं तो आपको क्लियर हो जाता है कि आपको क्या करना है और सब organize करने के बाद सब कुछ कैसा होगा. अब आप ख़ुद सोचिए कि अपने सभी अधूरे काम को मैनेज करने के बाद आप जो काम कर रहे हैं उस पर कितने अच्छे से फोकस कर पाएंगे. एक बार जब आप उन चीजों को इकट्ठा कर लेंगे जो आपका ध्यान भटका रहे थे तो आपको एक अलग सी पॉवर का एहसास होगा. तब आपको फील होगा कि आपकी लाइफ आपके कंट्रोल में है, आप लाइफ के वश में नहीं हैं.

इसलिए अगर सामान इकट्ठा करने के प्रोसेस में कुछ ज़्यादा समय लग जाए तो निराश ना हों क्योंकि काम पूरा होने के बाद आपकी मेहनत ज़रूर रंग लाएगी.

Processing: Getting "In" to Empty

पिछले चैप्टर में आपने सीखा कि कैसे अपने सभी अधूरे काम को कैसे इकट्ठा किया जाए जो आपका ध्यान भटकाते हैं. सामान इकट्ठा करते समय आपको उन चीज़ों को हटा देना चाहिए जिनकी आपको ज़रुरत नहीं है. अब उस काम को करने का समय है जिसे करने में आपको सिर्फ़ दो मिनट लगेंगे.

अगर आपके सामने कोई ऐसा काम आता है जिसे आप नहीं कर सकते या किसी ऐसे शख्स से करवाना है जो आपसे बेहतर उसे कर सके तो वो काम उन्हें सौंप दें. इसे करने के बाद, अब आपके पास वो काम बचेंगे जिन्हें करने में आपको दो मिनट से ज़्यादा समय लगेगा. ऐसे काम को आप सिंपल टास्क और बड़े प्रोजेक्ट जैसी केटेगरी में डिवाइड कर सकते हैं. आमतौर पर प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए ज़्यादा प्लानिंग की ज़रुरत होती है. जब आप अपने काम को डिवाइड कर रहे हों तो आपको उस काम को सबसे पहले करना

चाहिए जो सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट है, उसके बाद आप बाकी के काम कर सकते हैं. याद रखें कि आपको एक समय में एक ही काम को पूरा करना है और किसी भी काम को अधूरा नहीं छोड़ना है. अगर आप कल पर अपने काम को टालेंगे तो आपके माइंड में फ़िर वही चीजें चलने लगेंगी जो आपका ध्यान भटकाती हैं और आपको अपने गोल से दूर ले जाती है. ये टास्क अभी आपको आसान और क्लियर लग रहे होंगे लेकिन अगर आपने उन्हें प्रोसेस नहीं किया तो रूम से बाहर जाते ही आप उनके बारे में भूल जाएँगे. इसलिए अपने गोल को हासिल करने के लिए, आपको कौन सा काम करना है उसके बारे में ठीक से लिखें. आइए कुछ एग्ज़ाम्पल से समझते हैं. मान लीजिए कि आपको अपने लिविंग रूम की सफाई करनी है.

तो इस टास्क के लिए आपको लिखना चाहिए "मुझे कार्पेट साफ़ करना है, सोफ़े से धूल झाड़नी है और टेबल को थोड़ा लेफ्ट में सरकाकर वहाँ भी सफाई करनी है.... " ईमेल लिस्ट को organize करना है इसके लिए आप लिख सकते हैं "मुझे इम्पोर्टेन्ट ईमेल के जवाब देने हैं, जिसकी मुझे ज़रुरत नहीं वो सभी चीजें डिलीट करनी हैं और ईमेल की अलग-अलग केटेगरी भी बनानी है....."

अलमारी को साफ़ करना है

अलमारी की सफाई एक ऐसा काम है जिसे कोई भी करना पसंद नहीं करता. लेकिन जब आप एक क्लियर गोल सेट करते हैं तो वो काम करने के लिए आप सच में मोटीवेट हो जाते हैं. यहाँ आप लिख सकते हैं "मुझे उन कपड़ों को हटाना है जिनकी मुझे ज़रुरत नहीं है....." प्रेजेंटेशन के लिए तैयार करनी है

अगर आपको लगता है कि किसी काम को पूरा करने के लिए एक से ज़्यादा स्टेप्स की ज़रुरत है तो उसे प्रोजेक्ट की केटेगरी में डाल दें. इसके लिए बाद में और प्लानिंग की ज़रुरत होगी. एग्ज़ाम्पल के लिए, प्रेजेंटेशन की तैयारी करना भी किसी प्रोजेक्ट पर काम करने से कम नहीं है. प्रेजेंटेशन की प्लानिंग करते समय आपको एक टॉपिक चुनना होगा, फ़िर उसके बारे में कोई बुक या जर्नल पढ़नी होगी, उसके बाद आपको अपना ड्राफ्ट लिखना होगा, फ़िर बारी आती है स्लाइड शो तैयार करने की और अंत में लोगों के सामने बोलने की प्रैक्टिस करनी होगी.

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Getting things done part 3

 Getting Projects Creatively Under Way: The Five Phases of Project Planning 


कभी-कभी जब हम अपने "टू-डू-लिस्ट" को अपडेट नहीं करते, तो कई ऐसे आईडिया मिस कर देते हैं जो हमें बड़ी सक्सेस दिला सकते थे. इस प्रॉब्लम से बचने के लिए, हमें आगे का प्लान बनाने की ज़रुरत है.

प्लानिंग भी कई तरह की होती है. जहां आप हर टास्क के गोल और उस गोल को हासिल करने के लिए ज़रूरी स्टेप और एक्शन को क्लियर तरीके से सेट करते हैं, वहाँ आप हॉरिजॉन्टल (Horizontal) प्लानिंग को यूज़ कर सकते हैं. आमतौर पर इस तरह की प्लानिंग के लिए आपको ऐसे रिमाइंडर सेट करने होंगे जिन्हें आप आसानी से देख सकें ताकि आप उस टास्क को भूल ना जाएं और उसकी प्रोग्रेस को मॉनिटर कर सकें.

दूसरी तरह की प्लानिंग है वर्टीकल (Vertical) प्लानिंग. इसमें डिटेल पर फोकस करने की और हर स्टेप को पूरा करने के लिए solution ढूंढने की जरुरत होती है. इसका मतलब ये नहीं है कि इसके लिए आपको किसी स्पेशल सॉफ्टवेयर को यूज़ करना होगा. आप इसे पेपर पर लिख कर भी रिकॉर्ड बना सकते हैं.

हालांकि, प्लानिंग का सबसे इफेक्टिव तरीका होता है नेचुरल प्लानिंग. आपका ब्रेन इस दुनिया का सबसे बेहतरीन planner है. आपका ब्रेन ऐसी -ऐसी चीजें कर सकता है जिसकी बराबरी दुनिया का कोई सॉफ्टवेयर या नोटबुक नहीं कर सकता.

नेचुरल प्लानिंग में पांच स्टेप होते हैं. सबसे पहले, आपको अपने गोल को अचीव करने के लिए एक प्लान बनाना होगा. दूसरा, आपको ठीक से पता होना चाहिए कि अंत में उसका रिजल्ट क्या हो सकता है. तीसरा, आपको बहुत दिमाग और क्रिएटिविटी लगाकर अलग-अलग आईडिया के बारे में सोचना होगा. चौथा, आपको अपने आईडिया को organize करना होगा. अंत में, आपको ये पहचानना होगा कि अगला एक्शन क्या होना चाहिए.

एग्ज़ाम्पल के लिए आइए आपका डिनर प्लान करते हैं. जब आप रोज़मर्रा के काम की प्लानिंग करते हैं, तो आप automatically नेचुरल प्लानिंग यूज़ करते हैं. पहले आप ये देखते हैं कि इस डिनर का मकसद क्या है यानी क्या आप दोस्तों के साथ बाहर पार्टी करने जा रहे हैं? या ये कोई स्पेशल डेट या बिज़नेस डिनर है? पर्पस के हिसाब से आपका ब्रेन उस डिनर के लिए हदें सेट करना शुरू कर देता है जैसे कितने पैसे खर्च करने हैं, कौन सा खाना सर्व होना चाहिए, आपके कपड़े कैसे होने चाहिए वगैरह वगैरह.

दूसरा, जब आपका पर्पस क्लियर हो जाता है तो आप उसके रिजल्ट के बारे में सोचने लगते हैं जैसे कौन सा कैफ़े या फूड जॉइंट में जाना चाहिए, खाना किस तरह का होना चाहिए. आपके माइंड में उस जगह की इमेज बनने लगती है जहां आप जाने वाले हैं. आप ख़ुद को खिड़की के पास बैठा हुआ देखते हैं. यहाँ तक कि आप खाने की खुशबू और उसके taste के बारे में भी सोचने लगते हैं.

तीसरे स्टेप में आपके ब्रेन में अपने आप कई तरह के थॉट आने लगते हैं. आप उस टाइम के बारे में सोचने लगते हैं जब आपको वहाँ पहुंचना चाहिए. आपके मन में कई सवाल भी आते हैं जैसे क्या वो जगह खुली होगी? मुझे किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए? क्या मुझे टाइम पर कैब मिल जाएगी?

इस स्टेप के पूरा होने के बाद आप सब कुछ organize करना शुरू करते हैं. आप डिसाइड करते हैं कि ठीक आठ बजे आपको घर से निकलना है. अपने सिलेक्ट किए हुए रेस्टोरेंट में समय से पहुंचकर अपनी बुक की हुई टेबल पर बैठना है. फ़िर आप सोचते हैं कि आप अपनी पसंदीदा ब्लैक ड्रेस पहने रेस्टोरेंट की टेबल पर बैठे होंगे. यानी कि आपके माइंड में उस डिनर से रिलेटेड एक पूरी फिल्म चलने लगती है.

अब सब प्लानिंग ख़त्म कर आप पहला एक्शन लेते हैं जो है अपने दोस्त को फ़ोन करना और फ़िर रेस्टोरेंट को कॉल कर अपनी सीट बुक करना.क्या आपने कभी सोचा था कि आपका ब्रेन पूरे दिन इस तरह की प्लानिंग में लगा रहता है? तो क्यों ना अपने काम को पूरा करने के लिए इस तरह की नेचुरल प्लानिंग को यूज़ किया जाए. ये किसी भी फ्लोचार्ट या सॉफ्टवेयर को यूज़ करने से कम स्ट्रेसफुल होता है.

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Getting things done part 2

 A New Practice for a New Reality


क्या आपको लगता है कि काम की एक लंबी लिस्ट को कंट्रोल में रखते हुए भी दिन के अंत तक कोई आदमी रिलैक्स्ड फील कर सकता है? हाँ, ऐसा बिलकुल हो सकता है और ये बुक आपको दिखाएगी कैसे.

आज हमें एक ऐसे सिस्टम की ज़रुरत है जो हमें अपना काम भी करने दे और रिलैक्स्ड भी बनाए रखे. आज के इस भागते हुए दौर में जॉब शब्द को ठीक से समझा पाना मुश्किल हो गया है. आए दिन हमारी जॉब बदलती रहती है और हर रोज़ हम पर नई ज़िम्मेदारियाँ बढ़ती ही जा रही हैं.

पुराने समय में, एक एम्प्लोई को उसके गोल और ज़िम्मेदारियों के बारे में ठीक से बता दिया जाता था. लेकिन आज हमें खुद सोचना समझना पड़ता है कि दिन के ख़त्म होते-होते हमें काम कैसे पूरा करना है. इस वजह से हर आदमी पर प्रेशर बढ़ने लगा है.

इस बदलाव के लिए पहले आपको अपनी कुछ आदतों को बदलना होगा. सबसे पहले, आपको इस बारे में क्लियर होना होगा कि आप क्या करना चाहते हैं. अगर आपके पास कोई आईडिया है तो उसे क्लियर तरीके से लिखें और उसे शुरू करने के लिए एक डेट सेट करें. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपका मन बेचैन रहेगा, भटकता रहेगा. आप हर वक्त अपने हर काम के बारे में सोचते रहेंगे और जो काम आप अभी कर रहे हैं उस पर फोकस नहीं कर पाएँगे.

दूसरा, आप जो भी काम कर रहे हैं उस पर 100% फोकस करने की कोशिश करें. अपने काम को तेज़ी से पूरा करने के लिए आपका फोकल लेज़र की तरह सिर्फ होना चाहिए. जब आपके माइंड में एक क्लियर पिक्चर होता है और आप एक ऐसे माहौल में काम करते हैं जहां आपका ध्यान नहीं भटकता तो आप कंट्रोल में रहेंगे और स्ट्रेस महसूस नहीं करेंगे.

एग्ज़ाम्पल के लिए, मुझे आपसे एक सवाल पूछना है, पिछले को सुनते हुए क्या आपका ध्यान भटका? अगर हाँ, तो यकीनन कोई ऐसा काम बाकी है जिसे आप करना चाहते हैं लेकिन उसे अपने दिमाग से निकाल नहीं पाए.

जब आप कोई काम करने का फ़ैसला करते हैं तो आपका ब्रेन आपको तब तक उस काम की याद दिलाता रहता है जब तक आप उसे पूरा नहीं कर लेते. तो ज़रा सोचिए कि अगर 10 काम अधूरे पड़े हैं तो वो आपको कितना स्ट्रेस देता है? और इसमें कोई डाउट नहीं है कि ये टेंशन आपको किसी भी काम में concentrate नहीं करने देगा. इसका एक ही उपाय है, आपके दिमाग में आने वाली हर थॉट को लिखकर एक लिस्ट बनाएं. अपने काम या टास्क के बारे में लिखें और उसके नीचे उसकी डिटेल लिखें. आपको इस टास्क के लिए एक क्लियर डेडलाइन भी सेट करनी होगी ताकि आपका ब्रेन उसके बारे में चिंता करना बंद कर सके.

इसका लॉजिक बहुत सिंपल सा है, अगर आप कोई काम करना चाहते हैं और उसके लिए कोई डेडलाइन सेट नहीं करते तो आपका ब्रेन यही सोचता रहेगा कि अभी तो वो काम अधूरा है. इसलिए जब आप किसी दूसरे काम में बिजी होते हैं तो आपका ब्रेन आपना ध्यान उस काम की ओर खींचने लगता है जो उसे लगता है कि ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट है.

एक लिस्ट बनाने से आपका ब्रेन शांत हो जाएगा. उसे एक मैसेज मिल जाता है कि उस काम को करने के लिए आपने एक डेट फ़िक्स कर दी है तो वो निश्चिंत होकर दूसरे काम पर फोकस करने लगता है. हर हफ़्ते के अंत में इस लिस्ट को चेक करें और अगर उसमें कुछ बदलने की ज़रुरत है तो बदलकर उसे अपडेट करें.

काम करने वाली इस लिस्ट को "टू-डू-लिस्ट" कहा जाता है. जब तक आप अपने काम की एक क्लियर लिस्ट नहीं बनाते तब तक आपको किसी भी काम पर फोकस करना बेहद मुश्किल लगेगा. याद रखें, स्ट्रेस के बिना, कम समय में तेजी से काम पूरा करने का एक ही सीक्रेट है, अपना पूरा फोकस काम पर बनाए रखना.

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Getting things done

अगर आप अपने कामों को लेकर परेशान हो जाते हैं तो ये बुक आपके लिए ही है।

अगर आपने जन्म लिया है तो आप जितना संभाल सकते हैं आपको उससे ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ संभालनी होंगी. आप अपने दिन की शुरुआत एक लंबी "To-Do-List" कैसे करते हैं जिसे पूरा करने के लिए आप स्ट्रगल करते रहते हैं और इस वजह स्ट्रेस महसूस करते हैं कि आपने अपनी लाइफ का कंट्रोल ही खो दिया है. तो चिंता मत कीजिए क्योंकि हम आपके लिए एक बेहतरीन solution लेकर आए हैं. ये बुक आपको सिखाएगी कि अपनी लाइफ का कंट्रोल वापस कैसे हासिल करना है और कम समय में ज़्यादा काम कैसे पूरा करना है. यह समरी किसे पढ़नी चाहिए?

:- यंग प्रोफेशनल्स

:- हार्ड वर्क करने वाले लोग जो कम समय में ज़्यादा काम जो भी ज़्यादा आर्गनाइज्ड होना चाहते हैं करना चाहते हैं

ऑथर के बारे में डेविड ऐलन टाइम मैनेजमेंट कंसलटेंट हैं. उन्होंने "Getting Things Done" नाम की टाइम मैनेजमेंट मेथड बनाई थी जिसने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई. इस मेथड ने दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया है. डेविड अपने कोचिंग फर्म के सीईओ हैं, जो कंपनियों को अपने एम्प्लाइज के बीच प्रोडक्टिविटी और फोकस करने के माइंडसेट को बढ़ावा देने में मदद करती है.

इंट्रोडक्शन

क्या आपके पास करने के लिए बहुत सारा काम है लेकिन उसे पूरा करने के लिए टाइम ही

कम पड़ जाता है? क्या आप काम से ब्रेक लेना चाहते हैं लेकिन ज़िम्मेदारियों के कारण आप काम में एक भी दिन मिस नहीं कर सकते? क्या आप फंसा हुआ महसूस करते हैं और एक लंबा ब्रेक लेना चाहते हैं? अगर हाँ, तो आपने इस प्रॉब्लम को सोल्व करने के लिए बिलकुल परफेक्ट बुक चुना है. इस बुक ने लाखों लोगों की जिंदगी को बदल दिया है. आज हम इतने ज़्यादा स्ट्रेस में जी रहे हैं कि हर कोई कम से कम समय में अपना काम पूरा करने के रास्ते खोजने में लगा हुआ है. इस बुक में ऐसा मेथड बताया गया है जो इन सभी problems को सोल्व करने की ताकत रखता है. इस बुक में आप ये जानेंगे कि ध्यान भटकने से बचने के लिए आपको आर्गनाइज्ड होना कितना ज़रूरी है. आपको समझ आने लगेगा कि समय की कमी का असली कारण आपके मन में चलने वाले वो अनगिनत विचार हैं जो आपका ध्यान भटका देते हैं जिससे आपका समय पर काम पूरा नहीं कर पाते.

इन सब का कारण फोकस है और अपने काम पर फोकस करने में मदद करने के लिए आपको अपने एनवायरनमेंट यानी माहौल को बदलने की ज़रुरत है. इन चीज़ों के साथ-साथ आप ये भी सीखेंगे कि अपनी लाइफ को organize करने के लिए सही टाइम, जगह और टूल्स को कैसे चुनें, इसकी शुरुआत आपको अपने आस पास के फिजिकल माहौल से करनी होगी और उसके बाद हम अपने मेंटल स्टेट की ओर बढ़ेंगे. जैसा कि आप जानते हैं कि हमारा ब्रेन हमेशा उन आइडिया के बारे में सोचता रहता है जिन्हें आप आज़माना चाहते हैं. जब आपके पास लाइफ में हर आईडिया और काम के लिए एक फाइलिंग सिस्टम होगा तो आपका मन शांत भी रहेगा और फोकस करने के लिए तैयार भी होगा.

ये बुक आपको अपने काम और प्रोजेक्ट को अलग-अलग केटेगरी में डिवाइड करने का तरीका भी सिखाएगी जो आपकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाएंगे. इसलिए अगर आप ज़िम्मेदारियों से भरे एक स्ट्रेस्फुल लाइफ से थक चुके हैं तो आइए हमारे साथ जुड़कर एक ऐसे सफ़र पर चलिए जो आपको सिखाएगी कि अपनी जिंदगी का चार्ज अपने हाथों में कैसे लेते हैं.

आपकी एक मुस्कान का प्रभाव। You can make Impression by just a Smile.

क्या आपको आप याद है? कभी आपके माता पिता ने आपको कभी बुलाया है और कहा है आपको कुछ लोगों से दूर रहने के लिए, या कुछ स्थानों पर ना जाने के लिए संभावित समस्याओं से बचने के क्रम में और बुरे तत्व वाले लोगों से दूर रहने के लिए। हम जिस जगह जाते हैं, जिन लोगों से मिलते हैं, जो कुछ करते हैं और जिन लोगों के साथ रहते हैं उनका हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। हमारे दैनिक कामों का हम पर कुछ स्तर तक प्रभाव होता है। अब कार्यों और शब्दों से प्रभावित करने के साथ साथ, हम में से हर एक कुछ प्रकार की शक्ति को लगाते हैं, हमारे कार्यों और शब्दों के माध्यम से प्रभावित करने के लिए।



प्रभाव का एक बहुत ही सरल उदाहरण हमारी एक मुस्कान है। हम लोगों के साथ मुसकुरातें हैं, वे भी हमारे साथ मुसकुरातें हैं। किसी को नमस्ते कह कर हम उसे भी वापस नमस्ते कहने के लिए प्रभावित करतें हैं। कठोर शब्दों के साथ किसी को भी आम तौर पर एक प्रतिकूल प्रतिक्रिया मिलाती है। कोई हम पर ट्राफिक में हॉर्न बजता है और हम उससे प्रभावित होकर हम भी वापस हार्न बजाते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता स्थिति या घटना से, प्रभाव तो कुछ बिंदु पर निर्भर करता है।

तुम इस क्षण में जो पढ़ रहे हो वो आपको आज कुछ प्रभावित करेंगे कुछ सोचने या करने के लिए। हम सब पर्यावरण के उत्पादों में से एक हैं। इसके आसपास कोई रास्ता नहीं है। हालांकि, हम चयन कर सकते हैं कि हम प्रभाव में कैसे प्रतिक्रिया करें। एक जल्द ठहराव किसी का दिन बनाने में अंतर हो सकता है। तो इसलिए अपने अच्छे प्रभावों से लोगों को प्रभावित करें और उनको भी अच्छा महसूस कराये। प्रभावित करने लिए मुबारक हो।

हाँ, मैं तुम पर विश्वास करता हूँ. Yes, I Believe you.

मेरे स्कूल के दिनों के दौरान, मैं एक बहुत ही शर्मीला और दूर रहने वाले बच्चों में से एक था मैं अपना पूरा दिन एक कोने में बैठ कर बिता सकता था। मेरे लिए, मेरी किताबें मेरी ही दुनिया थी। यहां तक कि छुट्टियों के दौरान, मैं सिर्फ जमीन के एक कोने में बैठता और अन्य लोगों के खेल को ही देखता रहता था। अपने साथियों की तुलना में, बहुत अधिक शर्मीला था, और मुझे कोई दोस्त बनने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, मैं हमेशा अपने आप को अपने बराबर वालों के नीचे महसूस करता था। मेरे मन में एक पूर्वाग्रह धारणा थी कि मैं हमेशा नई दोस्ती के लिए मुझे माना ही कर दिया जायेगा। और मैं सिर्फ अस्वीकृति का पीड़ित नहीं बनना चाहता था।






एक बार जब मेरी अंग्रेजी कक्षा के दौरान मेरे शिक्षक ने हमारे साथ एक छोटी सी कहानी साझा की है। यह राजा ब्रूस और एक मकड़ी के बारे में थी। यह एक हारी हुई लड़ाई और राजा ब्रूस के आसपास घूमती है, कि लड़ाई हारने के बाद भी अंत में जीत कैसे होती है। उन्होंने कहा कि जेल में एक छोटे से मकड़ी से उनको कैसे प्रेरणा मिली। मकड़ी को मिली असफलता और उसके द्वारा किये गए प्रयास से, जिस तरह के छोटे से कार्य ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैं अपने घर पर मकड़ियों के काम को देखना शुरू कर दिया है कि बहुत हैरान था। एक बार, एक मकड़ी एक दीवार के शीर्ष पर पहुँचने के लिए एक घंटे के आसपास ले लिया और मैंने निर्दयतापूर्वक उसे नीचे गिरा दिया। मेरे लिए आश्चर्य करने वाली बात थी कि सेकंड के भीतर ही फिर से उसने अपना रास्ता बनाने शुरू कर दिया।

इस घटना ने मेरा नजरियाही बदल दिया था। मुझे महसूस हुआ रिजेक्ट या असफल होना कोई बड़ी बात नहीं है। दुनिया बुरा बरताब करे, तो खड़ा होना चाहिए और दुवारा फिर से काम शुरू करना चाहिए। अभी समय है जब लोग पसंद करेंगे और सराहना करेंगे। उस के लिए, आज के दिन से, मुझे लोगों के साथ मिलना, नयी चीजें

सीखना और नए दोस्त बनाना अच्छा लगता है। मुझे लगता है, अस्वीकृति या विफलता बस कुछ शब्द हैं जो हमें आगे जाने से रोकते हैं और इनको कभी भी बदला जा सकता है।







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परिस्तिथि बदले तो मन भी बदलें




शिष्य ने गुरु से कहा- गुरुदेव!एक व्यक्ति ने आश्रम के लिए भेंट की है.
गुरु ने कहा- अच्छा हुआ. दूध पीने को मिलेगा.
एक सप्ताह बाद आकार शिष्य ने गुरु ने कहा-
गुरूजी! जिस व्यक्ति ने गाय दी थी, वह अपनी गाय वापस ले गया.
गुरु ने कहा- अच्छा हुआ! गोबर उठाने के झंझट से मुक्ति मिली.
जीवन में भी इसी बात तो समझाना जरुरी है. ऐसा व्यक्ति जो हर हाल में राजी हो उसे कोई दुखी नहीं कर सकता.
परिस्तिथि बदले, तो अपनी मानसिकता बदल लो.
बस दुःख, सुख में बदल जायेगा. क्योंकि सुख-दुःख आखिर दोनों मन के ही समीकरण हैं.

लोगों को प्रेरित कैसे करें. How to Insoire poeple.


जब आप किसी बेघर को आश्रय के लिए दान करने के लिए, शराब पीना छोड़ने के लिए या अपने कार्यकर्ताओं को कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं तो आप ये कुछ सरल तकनीक लागू कर सकते हैं। अगर आप किसी को प्रेरणा देना चाहते हैं, तो मेरे कुछ सुझाव आपको अवश्य पसंद आएँगे। नीचे दिए गए चरणों के साथ शुरू करें!

मिसाल पेश करके।




सबसे अच्छा तरीका है उदाहरण पेश करके आप अपने कर्मचारियों को प्रेरित करना किसी अवधि के माध्यम से उन्हे पुश करने के लिए या कठिन परिश्रम करने के लिए। आप एक अधिक काम अपने हाथ में ले और उसे करते हुए उनकी भी मदद करें। एक सक्रिय प्रबंधक सिर्फ एक मेज के पीछे नहीं बैठता वो उनको प्रेरणा भी देता है संस्थान के लिए कार्य करने के लिए।








उनकी जरूरतों को सुनिश्चित करें।



आप उन्हे दिखाएँ की आप उनकी अपनी व्यक्तिगत-भलाई के बारे में परवाह है। जब वे कुछ अच्छा करें तो आप उन्हे उसके लिए सम्मानित करें व उनको अच्छा महसूस कराएँ उनके कार्य के लिए। उन्हे प्रमोट करें जब वे इसके योग्य हों। इस सब से उन्हे यह अहसास होगा की आप उनके लिए किसी से भी उनके हक के लए लड़ सकते हैं और वे अधिक मन से कार्य करेंगें।

उन्हें गर्व महसूस कराएँ।


आप भी उनके कार्य में रूचि लें. उन्हे दिखाए कि आप उनके किए कार्य और उनके द्वारा दी गयी सर्विस के लिए आप उन पर गर्व महसूस करते हैं। अगर उनको उनके किय कार्य पर गर्व होगा तो वे और कड़ी मेहनत और पूर्णता के लिए प्रयास की और अधिक संभावना हो जाएगा।



अपने वादे को पूरा।


जब आप उन्हें कोई वादा करें कुछ देने के लिए या उन्हें एक प्रोत्साहन दे, तो आप अपने वादे को सही वक्त पर पूरा करें। आपके उन्हें उनके भविष्य के वादे को पूरा करने के लिए जागरूक करना होगा जिससे वे अपेक्षाओं को नाकाम न करें व उन्हें ये लगे की अगर वे नाकाम हुए तो उनको यह मौका मिलने की संभावना भविष्य में नही होगी।

"Radha Krishna" is the supreme loving God. "राधा कृष्ण" सर्वोच्च प्यारे-परमेश्वर हैं।

 राधा कृष्ण सामूहिक रूप



   राधा कृष्ण सामूहिक रूप से भगवान की स्त्री के साथ ही मर्दाना दोनों रूपों के संयोजन के रूप में हिंदू धर्म में जाना जाता है। कृष्णा को गौड़ीय वैष्णव धर्मशास्त्र में स्वयं भगवान के रूप में जाना जाता है और राधा कृष्ण के सुप्रीम प्यारी है। राधा जी को सर्वोच्च देवी के रूप में स्वीकार किया गया है, वह अपने प्यार से कृष्णा को नियंत्रित करती हैं। 
  दुनिया का मानना है कि कृष्ण सबको प्रसन्न करते हैं और राधा जी एक झलक से ही कृष्णा प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए राधा जी सर्वोच्च देवी है"। राधा कृष्ण की पूजा हिंदू धर्म की परंपराओं में की जाती है।

  भारत में, श्री श्री राधा कृष्ण के मंदिर भारत भर में प्रचलित हैं और वृन्दावन और मथुरा सहित ब्रज मंडल को दुनिया में राधा-कृष्ण की पूजा के केन्द्रों माना जाता है। वृन्दावन के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में प्रेम मंदिर वृंदावन, मदन-मोहन, गोविंद देव, राधा-रमण, राधा-गोकुलनंदा, राधा-दामोदर, बांकी-बिहारी, जुगल किशोर, राधा-गोपीनाथ, राधा श्यामसुंदर, और इस्कॉन मंदिर शामिल हैं।

   Radha Krishna ( राधा कृष्ण) are collectively known within Hinduism as the combination of both the feminine as well as the masculine aspects of God. Krishna is often referred as svayam bhagavan in Gaudiya Vaishnavism theology and Radha is Krishna's supreme beloved. With Krishna, Radha is acknowledged as the Supreme Goddess, for it is said that she controls Krishna with Her love. 
   It is believed that Krishna enchants the world, but Radha "enchants even Him. Therefore She is the supremegoddess of all. Radha Krishna". Radha Krishna are worshiped in the traditions of Hinduism.

  In India, Temples of Sri Sri Radha Krsna are prevalent throughout India and the world though Braja Mandala including Vrindavan and Mathura are considered to be the centers of Radha-Krishna worship. The most important temples of Vrindavana are Prem Mandir Vrindavan, Madan-mohan, Govindadev, Radha-Raman, Radha-Gokulananda, Radha-Damodar, Banki-behari, Jugal Kishor, Radha-Gopinath, Radha Shyamasundar, and Iskcon temple.

Chuha Ganesha With Green Pan Leaf Gold Polished. चूहा गणेश हरे पान का पत्ता और सोने पॉलिश के साथ.

Mannretails Chuha Ganesha With Green Pan Leaf Gold Polished

भगवान गणेश हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख देवताओं में से एक है। गणेश जी को अद्वितीय गौरव प्राप्त है। कि उनका नाम हमेशा किसी भी प्रार्थना में किसी भी अन्य भगवान के नाम से पहले लिया जाता है.
    वह कई विशेषताओं के लिए जाना जाता है, गणेश के हाथी सिर से उनकी पहचान बहुत ही आसान और सदा बनती है। गणेश व्यापक रूप से बाधाओं को हरने वाले, कला और विज्ञान के संरक्षक और बुद्धि और ज्ञान के देवा के रूप में प्रतिष्ठित है। गणेश जी की पूजा से ही पूजा शुरू होती है और इसलिए उनको रस्में और समारोहों की शुरुआत में सम्मानित किया जाता है। गणेश जी लिख सत्र के दौरान पत्र और सीखने के संरक्षक के रूप में भी पूजे जाते हैं है। कई अलग-अलग ग्रंथों व शास्त्र में इनके जन्म और कारनामों से साथ जुड़े पौराणिक उपाख्यानों संबंधित और लिखित हैं।

Lord Ganesh is one of the most prominent deities in Hinduism. Ganesh has the unique distinction that his name is always invoked before any other God’s name in any prayer.
    Although he is known by many attributes, Ganesha's elephant head makes him easy to identify. Ganesha is widely revered as the remover of obstacles, the patron of arts and sciences and the deva of intellect and wisdom. As the god of beginnings, he is honoured at the start of rituals and ceremonies. Ganesha is also invoked as patron of letters and learning during writing sessions. Several texts relate mythological anecdotes associated with his birth and exploits and explain his distinct iconography.

Lord Buddha Gold Polished Glass Handicraft Idol. भगवान बुद्ध गोल्ड पॉलिश कांच हस्तकला मूर्ति.

Mannretails Lord Buddha Gold Polished Glass Handicraft Idol

बुद्ध का मतलब है 'जाग्रत', जब कोई अज्ञानता नींद से जागता है और वस्तुओं को वास्तविक रूप में देखता है। आप बौद्ध धर्म के शिक्षण से प्रेरित हो सकते हैं। अपने पूजा स्थान पर बुद्ध की इस प्रतिमा को जोड़ें और इस धर्म से जुड़ाव महसूस करें। बुद्ध अकेले किसी के लिए दुख से मुक्ति पाने का रास्ता बताते हैं कि कैसे महायान शिक्षण में वह दूसरों की खातिर, पूर्ण ज्ञान या बुद्ध हुड प्राप्त करें।

‘Buddha’ means ‘Awakened One’, someone who has awakened from the sleep of ignorance and sees things as they really are. You can get inspired from the teaching of Buddhism. Add this idol of Buddha to your worship place and feel religious. Buddha explains how to attain liberation from suffering for oneself alone, and in the Mahayana teaching he explains how to attain full enlightenment, or Buddha hood, for the sake of others.

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फेंगशुई उपयोगी है विधार्थियों के लिए. Fengshui is best for Students.


'फेंगशुई का उपयोग आज कल बहुत तेज़ी से बढ़ गया है ख़ासकर लोग इनको अपनी समस्यायों के समाधान के लिए ज़्यादा प्रयोग करते हैं, 'फेंगशुई का प्रयोग हम एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं, कैसे?

  •     अपनी स्टडी रूम में हारे पर्दों का प्रयोग करें।
  •     स्टडी रूम या घर में कहीं लड़ाई या टूटे खिलौने हैं तो उन्हे तुरंत हटा दें क्योंकि इनसे उत्पन्‍न नकारात्मक ऊर्जा नाक, कान, गला व आँख के इंफेक्शन का कारण होती है।
  •     स्टडी रूम व घर में कहीं भी अगर बंद घड़ियाँ नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं और अगर किसी कारण से आप इन्हे फेकना या बेचना नहीं चाह रहे हैं तो इन्हे ठीक करा लें।
  •     सकारात्मक ऊर्जा एवम् पढ़ाई में एकाग्रता के लिए पढ़ाई के कमरे के दक्षिण-पूर्व कोने में मनी प्लांट लगाए तथा उत्तर-पूर्व दिशा में फिश एक़्वेरियम रखें।
  •     विधार्थी अपनी स्टडी टेबल पर ईशान कोण में ग्लास हैंडीक्राफ्ट की मूर्ति रखें, इससे शिक्षा ओ ज्ञान में ब्रध्दि होती है व अपेक्षित परिणाम मिलते है. उनके मित्र भी सक्रिय होकर उनकी मदद करते हैं।
  •     विधार्थी अपनी पूर्व की दीवार साफ-सुथरी रखें. हरा बल्ब, हरा पोधा, हरा पिरामिड पूर्व में रखें. बैम्बू प्लांट भी रख सकते हैं।

How to Know your Concentration level. अपनी एकाग्रता का स्तर कैसे पता करें।


अपनी एकग्रस्ता का स्तर जानने के लिए आपका कोई विशेषज्ञ होना ज़रूरी नही है, और किसी विशेषज्ञ को जानने की भी आवश्यकता भी नही है। बस नीचे दिए गये प्रश्नों के उत्तर 'हाँ' या 'नहीं' में दे कर भी आप खुद का आंकलन कर सकते हैं, प्रत्येक 'हाँ' के लिए अपने को एक अंक दें और आख़िर में सब को जोड़ कर अपनी एकाग्रता के स्तर की पहचान करें।


1.  आप बात करते करते भूल जाते हैं कि क्या बात करनी है?
2.  अपनके मन के विपरीत कोई कार्य करना आपको बोझ लगता है?
3.  किसी भी कार्य को करने में आपको ज़रूरत से अधिक या दौगुना समय लगता है?
4.  किसी भी एक बस्तु पर आपको ध्यान देने के लिए कहा जाए तो आपके सिर में दर्द होने लगता है?
5.  आपके कन व दिमाग़ ठीक होने पर भी आपको कोई बात सुनने में समझने में कठिनाई होते है?
6.  आपको लिखने, पड़ने या कोई एकाग्र कार्य करने के लिए शांत माहोल की आवश्यकता होती है?
7.  आप कोई भी कार्य तबी कर सकते हैं जब तक वह आपको आता हो या आपके मन का हो?
8.  क्या आपको नया काम, नया कोन्सेपट, नये लोगो, नये माहौल आदि को स्वीकारने में परेशानी होती है?
9.  आपके आस-पास का शोर, आवाज़ें, संगीत या कोई तेज सुगंध आपके कार्य या ध्यान में आसानी से बाधा
      डालती है?
10. आँखों में कोई भी परेशानी ना होने पर भी आप बहुत जल्दी-जल्दी पलकें झपकते, या आपकी आँखों की
      पुतलियाँ कम स्थिर रहती हैं?
11. आपको कोई रास्ता या नया स्थान एक बार में याद रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है?
12. बिना हिले-डूले एक स्थान पर आपको अडज़्क समय बैठने में बैचेनी होती है या आप थोड़े देर भी बिना
      हाथ-पैर चलाए शांत नही बैठ सकते हैं?
13. आपको कोई भी कार्य अकेले करने में या स्वतंत्र रूप से करने में डर लगता है, खास तौर पर जब मंच पर
      बोलना हो या ड्राइविंग करनी हो?
14. किसी एक कार्य की यदि आपको थोड़े लंबे समय तक करना पड़े तो आपको बोरियत होने लगती है?
15. अपने बाइक की चाभी कहाँ रखी थी, कौन-सी बात किससे कहनी थी, कौन-सी बस्तु कहाँ रखी थी आप
     शीघ्र भूल जाते हैं?

विश्लेषण:

10-15 हाँ:- अगर आपके हैं तो आपमें एकाग्रता की बहुत कमी है, इसी कारण आपको किसी भी कार्य को करने में अधिक समय लगता है, बल्कि आपको कई बार असफलता का भी सामना करना पड़ता है. यहां तक कि मानसिक, शारीरिक और व्यवसाय संबंधों आदि में भी समस्या एकाग्रता में कमी के करना ही उत्पन्न होती है. आप घबराएं नही इस परेशानी का हाल है, आप किसी मानोविशेषज्ञ से अपनी समस्या के बारे में बात करनी चाहिए. साथ ही मेंटल, फ़िजिकल एक्सरसाइज, ध्यान से भी आप अपनी इस समस्या को ठीक कर सकते हैं.

5-10 हाँ:- चाहे आप का स्कोर मध्य में ही है पर आपमें भी एकाग्रता की कमी है. माना इसका स्तर उतना नहीं है पर आपने अपना ख्याल नहीं रखा तो आपके जीवन पर भी इसका असर पड़ सकता है. ऐसा ना ही इसके लिए ध्यान व मेंटल, फ़िजिकल एक्सरसाइज करते रहें और अपनी एकाग्रता को बनाए रखें व सुधारते रहें.
1-5 हाँ:- आपको कोई भी चिंता करने की ज़रूरत नही है आप ख़तरे की सीमा से बहुत दूर हैं. परफ़ेक्ट कोई भी नही होता, बढ़ते कम और ज़िम्मेदारियों तथा आजकल की जीवन शैली में एकाग्रता में इतनी कमी स्वाभिक हैं।

अधिक लनकारी के लिए देखें:-

Don't fear failure so much. असफलता से इतना ना डरिये।


Don't fear failure so much. असफलता से इतना ना डरिये।



सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब भी कोई व्यक्ति कोई कार्य करता है तो उसे इन दो पहलुओं से होकर गुज़रना पड़ता है और इसका पता कार्य पूरा हो जाने के बाद ही पता चलता है कि आप सफल हुए या असफल।
कई लोगों पर असफलता का डर इतना हाबी हो जाता है कि किसी भी कम में हाथ डालने से पहले हिचकिचाते हैं। उनकी ज़ुबान पर एक ही बात रहती है कि मैं सफल हुँगा या नही, मैं ये नही कर सकता, ये बहुत कठिन है बगैराह बगैराह। ऐसे लोगो में जिंदगी भर ये मलाल रहता है की एक बार करके दो देखना था शायद हो जाता।
उनके दिमाग़ में ये भी चलता रहता है कि मैं ये कर लूँ, मैं वो कर, ऐसे लोग कुछ नही कर पाते। वे या तो परिजनों पर बोझ बन कर रह जाते हैं या फिर योजना के लिहाज से मामूली काम कर के पेट भरने की जुगाड़ देखते रहते हैं। वे जिधर भी जाते हैं उन्हें लगता है असफलता उनका इंतजार कर रही है और उनकी ये काल्पनिक असफलता उनको किसी भी ओर बडने नही देती।

  

अक्सर ऐसा होता है कि जो व्यक्ति असफलता के डर का शिकार होता है, वह अपनी योजनाएं अपने परिचितों तक को भी नही बता पाता। दरअसल ऐसे लोगो को लगता है कि अगर असफल हुए तो वे लोगो के बीच मज़ाक का पात्र बन जाएँगे.
   एक मशहूर शायर ने क्या खूब लिखा है:-
            क्‍यों डरें जिंदगी में क्या होगा।
            कुछ ना हुआ तो तजुर्बा ज़रूर होगा।।

इसलिए अगर आप हमेशा यही सोचते रहेंगे कि मैं कहीं असफल ना हो जाऊ तो यकीन मनिये कि आप कभी सफल नहीं होंगे, आप अपने डर को भगा कर पूरे मन के साथ अपने कम में लगिये और महनत करिये, फिर देखिए की आपको सफल होने से कोई नही रोक पाएगा।

How to Be a Role Model. रोल मॉडल कैसे बने.

         रोल मॉडल का मतलब प्रेरित, हिदायत, और एक अच्छा उदाहरण स्थापित करना होता है। जब आप अपने बच्चों को बुनियादी मूल्यों को सिखाने की कोशिश कर रहे हो या अपने छात्रों को एक सीखने के माहौल में खुद को संचालन करने के लिए उचित रास्ता दिखा रहे हैं, सबसे महत्वपूर्ण बात है आप  ईमानदार, विचारशील, और लगातार रहें है। रोल मॉडल का बिलकुल सही होना जरूरी नहीं है, लेकिन उनको बताना ज़रूरी है की हर कोई गलती करता है और इसके लिए उनको उसके लिए जवाबदेह होना चाहिए है। आप भी एक प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद रोल मॉडल हो सकते हैं।
रोल मॉडल कैसे बने.

अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल होना

आपनी कही बातों का अभ्यास करें।

 आप अपने बच्चों के लिए एक अच्छा रोल मॉडल होना चाहते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आपको वो करना चाहिए जो आप कहते हैं। ये ज़रूरी नही है कि जो नियम आपके बच्चे पर लागू होते हो वो आप पर ना होते हों, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें अपने आचरण का एक अच्छा उदाहरण दिखाएँ। आपका बच्चा आपके व्यवहार को  मॉडलिंग करेगा और उन्हें दिखाने के लिए महत्वपूर्ण है जो आप उनमें देखना चाहते है।

-     अगर आप उन्हें बताएँगे अच्छा बनाना है, तो आप उनके सामने वेट्रेस से बुरा व्यवहार ना करें.करते।
-     अगर आप उन्हें बताएँगे अच्छा व्यवहार करना है, तो अपने मुँह बुरी बात नहीं करें करते।
-     अगर आप उन्हें बताएँगे अपना कमरा साफ रखना है, तो आप अपने कमरे को अच्छी तरह स्वच्छ रखें लिए।
-     अगर आप हमेशा स्वस्थ खाद्य पदार्थ खाने के लिए अपने बच्चों को पूछते हैं, तो उन्हें आप एक समय में    
      आलू पर सलाद ज़रूर चुनते हुए देखें हैं।




यदि आपने गलती की है तो उसे स्वीकरें।

 ऐसे आता पिता बनाने के लिए अपने आप पर दबाव ना डालें जो कभी ग़लती नहीं करते लिए। यह असंभव है कोई बात बिगड़ जाए और कभी आप गुस्से में भड़क जाए तो आपको अफसोस करना चाहिए होगा। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप व्यवहार को स्वीकार करते हैं और कुछ भी नहीं हुआ के नाटक के बजाय कि इसके लिए माफी माँगते है। आप दुर्व्यवहार करते हैं और यह नाटक करते हैं कि कुछ हुआ ही नहीं है तो आपके अपने बच्चों को वे भी ऐसा संदेश मिलेगा कि वो भी ऐसा करने में सक्षम हैं जाएगा।

     आपने कुछ गलत किया है, तो अपने बच्चों के पास बैठें, उनकी आँखों में देखें, और जताएँ कि आपको सच में खेद है कि अपने ऐसा किया है। यह सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे को वह भी ये बात समझ आए, और उनको भी पता चले कि कैसे माफी माँगे जब वह कुछ गलत करें।

 

जवाब ढूँडने में मदद करें और सही उत्तर के लिए सोचें।

अपने बच्चों को ऐसा ना दिखाएँ कि आपको हर आता है। वास्तव में, आप उनको दिखाएँ की आपको कितनी मेहनत करनी पड़ती है सवालों के सही जवाब के लिए, और उनको सही जवाब खोजने की प्रक्रिया में आमंत्रित करें। जब कोई कठिन स्थिति पैदा हो, तो विधि तथा निषेध दोनों पक्षो को तौलना सिखाएं, और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनको शामिल कर सकते हैं।

     उदाहरण के लिए, जैसे आप कह सकते हैं, "मुझे लगता है मैं अभी तुम्हारे दोस्तों के साथ खेलता, लेकिन मुझे लगता है कि तुमको पहले अपने विज्ञान परियोजना को पूरा करना चाहिए। आप याद दिला सकते हैं कि पिछली बार देर से एक परियोजना को पूरा करने में तुम कितने परेशान हो गए थे, मैं पहले अपने काम करने की आदत को बनाना चाहता हूँ बजाए पहले खेलने के। "



अपने बच्चों सहित, सभी के साथ सम्मान से पेश आएँ समझो।

 आप अपने बच्चों के लिए एक अच्छा रोल मॉडल होना चाहते हैं, तो आप के आसपास हर किसी के साथ सम्मान के साथ पेश आना होगा, आप गार्ड से लेकर अपने पड़ोसियों तक. आपको अपने बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए बजाए अविवेकी होने के, क्योंकि वे आपके ऐसे व्यवहार को अपने मन में बिता सकते हैं होगा।

     वे तुम्हें एक वेट्रेस के साथ किए कठोर व्यवहार को देखते हैं तो उनको लगेगा कि ये सही तरीका है और वे इसे अपना व्यवहार बना सकते हैं होगा।
     यहां तक कि अगर। आपका अपने साथियों या कर्मचारियों के साथ संघर्ष है, तो अपने भाई बहनों को भी इसके बारे में बहुत नहीं बताएं, ख़ासकर जब आप गुस्सा हो अगर। उन्हें यह ना लगे की एसी गपशप बातें लोगों के बारे में करना सही है चाहती।



अपनी बात पर स्तिर रहो।

 आप अपने बच्चों के लिए एक अच्छा रोल मॉडल होने के लिए क्या करना है एक और बात यह है कि आप घर में व्यवस्था बनाए रखने के रास्ते में लगातार रहें है। यदि आपका एक नियम है कि जब तक वे अपने होमवर्क ना कर ले तब तक वे अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए नहीं जा सकते हैं, तो आपको हमेशा यह नियम मनवाना होगा, बजाय यह देखने की बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए कितनी बुरी तरह से ज़िद कर रहा है।

कभी कभी यदि आप अपने नियमों में थोड़ी ढील देते हैं तो चलेगा, पर यह छूठ भी ज़्यादा ना रहे नहीं तो वे भ्रमित हो जाएँगे. उदाहरण के लिए, आपकी बेटी को उसके सालाना जलसे के लिए जाना है, तो यह उसके लिए एक या दो घंटे अतिरिक्त ठीक हो सकता है, लेकिन क्योंकि केवल यह एक विशेष अवसर है।
आपका एक साथी है, और आपको एक संयुक्त होना जरूरी है।



अपने साथी के साथ सम्मान से पेश आयें समझो।

 अपने साथी के साथ आपका रिश्ता, आपके बच्चे को देखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक हो सकता है। कोई रिश्ता एकदम सही नहीं है, तो आप अपने बच्चों को दिखा सकते हैं कि दो लोग प्यार से एक दूसरे के साथ, समझौता और प्यार करके एक साथ काम करते हैं, और एक जोड़ी के रूप में विकसित कर सकते हैं।

     कभी कभी, तुम गुस्सा हो जाते हो और अपनी आवाज तेज कर देते हो। अगर ऐसा होता है, तो आपको दिखावा करने की जरूरत नहीं है कि सब कुछ ठीक है, और अगर यह सब आपके बच्चों ने सुन लिया है तो आप कह सकते हैं की कुछ समय के लए आप अपने आपे से बाहर चले गये थे, आप अपने व्यवहार पर गर्व महसूस ना करें।