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Chuha Ganesha With Green Pan Leaf Gold Polished. चूहा गणेश हरे पान का पत्ता और सोने पॉलिश के साथ.

Mannretails Chuha Ganesha With Green Pan Leaf Gold Polished

भगवान गणेश हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख देवताओं में से एक है। गणेश जी को अद्वितीय गौरव प्राप्त है। कि उनका नाम हमेशा किसी भी प्रार्थना में किसी भी अन्य भगवान के नाम से पहले लिया जाता है.
    वह कई विशेषताओं के लिए जाना जाता है, गणेश के हाथी सिर से उनकी पहचान बहुत ही आसान और सदा बनती है। गणेश व्यापक रूप से बाधाओं को हरने वाले, कला और विज्ञान के संरक्षक और बुद्धि और ज्ञान के देवा के रूप में प्रतिष्ठित है। गणेश जी की पूजा से ही पूजा शुरू होती है और इसलिए उनको रस्में और समारोहों की शुरुआत में सम्मानित किया जाता है। गणेश जी लिख सत्र के दौरान पत्र और सीखने के संरक्षक के रूप में भी पूजे जाते हैं है। कई अलग-अलग ग्रंथों व शास्त्र में इनके जन्म और कारनामों से साथ जुड़े पौराणिक उपाख्यानों संबंधित और लिखित हैं।

Lord Ganesh is one of the most prominent deities in Hinduism. Ganesh has the unique distinction that his name is always invoked before any other God’s name in any prayer.
    Although he is known by many attributes, Ganesha's elephant head makes him easy to identify. Ganesha is widely revered as the remover of obstacles, the patron of arts and sciences and the deva of intellect and wisdom. As the god of beginnings, he is honoured at the start of rituals and ceremonies. Ganesha is also invoked as patron of letters and learning during writing sessions. Several texts relate mythological anecdotes associated with his birth and exploits and explain his distinct iconography.

How to Know your Concentration level. अपनी एकाग्रता का स्तर कैसे पता करें।


अपनी एकग्रस्ता का स्तर जानने के लिए आपका कोई विशेषज्ञ होना ज़रूरी नही है, और किसी विशेषज्ञ को जानने की भी आवश्यकता भी नही है। बस नीचे दिए गये प्रश्नों के उत्तर 'हाँ' या 'नहीं' में दे कर भी आप खुद का आंकलन कर सकते हैं, प्रत्येक 'हाँ' के लिए अपने को एक अंक दें और आख़िर में सब को जोड़ कर अपनी एकाग्रता के स्तर की पहचान करें।


1.  आप बात करते करते भूल जाते हैं कि क्या बात करनी है?
2.  अपनके मन के विपरीत कोई कार्य करना आपको बोझ लगता है?
3.  किसी भी कार्य को करने में आपको ज़रूरत से अधिक या दौगुना समय लगता है?
4.  किसी भी एक बस्तु पर आपको ध्यान देने के लिए कहा जाए तो आपके सिर में दर्द होने लगता है?
5.  आपके कन व दिमाग़ ठीक होने पर भी आपको कोई बात सुनने में समझने में कठिनाई होते है?
6.  आपको लिखने, पड़ने या कोई एकाग्र कार्य करने के लिए शांत माहोल की आवश्यकता होती है?
7.  आप कोई भी कार्य तबी कर सकते हैं जब तक वह आपको आता हो या आपके मन का हो?
8.  क्या आपको नया काम, नया कोन्सेपट, नये लोगो, नये माहौल आदि को स्वीकारने में परेशानी होती है?
9.  आपके आस-पास का शोर, आवाज़ें, संगीत या कोई तेज सुगंध आपके कार्य या ध्यान में आसानी से बाधा
      डालती है?
10. आँखों में कोई भी परेशानी ना होने पर भी आप बहुत जल्दी-जल्दी पलकें झपकते, या आपकी आँखों की
      पुतलियाँ कम स्थिर रहती हैं?
11. आपको कोई रास्ता या नया स्थान एक बार में याद रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है?
12. बिना हिले-डूले एक स्थान पर आपको अडज़्क समय बैठने में बैचेनी होती है या आप थोड़े देर भी बिना
      हाथ-पैर चलाए शांत नही बैठ सकते हैं?
13. आपको कोई भी कार्य अकेले करने में या स्वतंत्र रूप से करने में डर लगता है, खास तौर पर जब मंच पर
      बोलना हो या ड्राइविंग करनी हो?
14. किसी एक कार्य की यदि आपको थोड़े लंबे समय तक करना पड़े तो आपको बोरियत होने लगती है?
15. अपने बाइक की चाभी कहाँ रखी थी, कौन-सी बात किससे कहनी थी, कौन-सी बस्तु कहाँ रखी थी आप
     शीघ्र भूल जाते हैं?

विश्लेषण:

10-15 हाँ:- अगर आपके हैं तो आपमें एकाग्रता की बहुत कमी है, इसी कारण आपको किसी भी कार्य को करने में अधिक समय लगता है, बल्कि आपको कई बार असफलता का भी सामना करना पड़ता है. यहां तक कि मानसिक, शारीरिक और व्यवसाय संबंधों आदि में भी समस्या एकाग्रता में कमी के करना ही उत्पन्न होती है. आप घबराएं नही इस परेशानी का हाल है, आप किसी मानोविशेषज्ञ से अपनी समस्या के बारे में बात करनी चाहिए. साथ ही मेंटल, फ़िजिकल एक्सरसाइज, ध्यान से भी आप अपनी इस समस्या को ठीक कर सकते हैं.

5-10 हाँ:- चाहे आप का स्कोर मध्य में ही है पर आपमें भी एकाग्रता की कमी है. माना इसका स्तर उतना नहीं है पर आपने अपना ख्याल नहीं रखा तो आपके जीवन पर भी इसका असर पड़ सकता है. ऐसा ना ही इसके लिए ध्यान व मेंटल, फ़िजिकल एक्सरसाइज करते रहें और अपनी एकाग्रता को बनाए रखें व सुधारते रहें.
1-5 हाँ:- आपको कोई भी चिंता करने की ज़रूरत नही है आप ख़तरे की सीमा से बहुत दूर हैं. परफ़ेक्ट कोई भी नही होता, बढ़ते कम और ज़िम्मेदारियों तथा आजकल की जीवन शैली में एकाग्रता में इतनी कमी स्वाभिक हैं।

अधिक लनकारी के लिए देखें:-

Don't fear failure so much. असफलता से इतना ना डरिये।


Don't fear failure so much. असफलता से इतना ना डरिये।



सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब भी कोई व्यक्ति कोई कार्य करता है तो उसे इन दो पहलुओं से होकर गुज़रना पड़ता है और इसका पता कार्य पूरा हो जाने के बाद ही पता चलता है कि आप सफल हुए या असफल।
कई लोगों पर असफलता का डर इतना हाबी हो जाता है कि किसी भी कम में हाथ डालने से पहले हिचकिचाते हैं। उनकी ज़ुबान पर एक ही बात रहती है कि मैं सफल हुँगा या नही, मैं ये नही कर सकता, ये बहुत कठिन है बगैराह बगैराह। ऐसे लोगो में जिंदगी भर ये मलाल रहता है की एक बार करके दो देखना था शायद हो जाता।
उनके दिमाग़ में ये भी चलता रहता है कि मैं ये कर लूँ, मैं वो कर, ऐसे लोग कुछ नही कर पाते। वे या तो परिजनों पर बोझ बन कर रह जाते हैं या फिर योजना के लिहाज से मामूली काम कर के पेट भरने की जुगाड़ देखते रहते हैं। वे जिधर भी जाते हैं उन्हें लगता है असफलता उनका इंतजार कर रही है और उनकी ये काल्पनिक असफलता उनको किसी भी ओर बडने नही देती।

  

अक्सर ऐसा होता है कि जो व्यक्ति असफलता के डर का शिकार होता है, वह अपनी योजनाएं अपने परिचितों तक को भी नही बता पाता। दरअसल ऐसे लोगो को लगता है कि अगर असफल हुए तो वे लोगो के बीच मज़ाक का पात्र बन जाएँगे.
   एक मशहूर शायर ने क्या खूब लिखा है:-
            क्‍यों डरें जिंदगी में क्या होगा।
            कुछ ना हुआ तो तजुर्बा ज़रूर होगा।।

इसलिए अगर आप हमेशा यही सोचते रहेंगे कि मैं कहीं असफल ना हो जाऊ तो यकीन मनिये कि आप कभी सफल नहीं होंगे, आप अपने डर को भगा कर पूरे मन के साथ अपने कम में लगिये और महनत करिये, फिर देखिए की आपको सफल होने से कोई नही रोक पाएगा।