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Maggi Banned in India. हमारा भारतीय समाज भी अजीब है कोई भी सही काम आसानी से पचा नहीं पाता।

हमारा भारतीय समाज भी अजीब है कोई भी सही काम आसानी से पचा नहीं पाता। अब मैग्गी पर लगे बैन को ही देख लीजिये, कोई ये नहीं कह रहा कि यह सही हुआ है कि एक बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले उत्पाद पर रोक लग गई। हर कोई लगा हुआ है इस रोक का मज़ाक उडाने में। कुछ whatsapp पर आये मेसेज की बानगी देखिये-
1. एक मेसेज के अनुसार मैग्गी से जहरीला दूध बिक रहा है उसे क्यों नहीं रोकते।
2. दूसरे मेसेज के अनुसार जब यूपी वालो का सडे हुए तेल के भठूरे, मच्छरो से भरी चाशनी की जलेबी आदि कुछ ना बिगाड़ पायी तो मैग्गी का लेड क्या चीज़ है।
3. तीसरे मेसेज के अनुसार अगर मैग्गी में लेड है तो क्या सिगरेट गुटके में पौष्टिक तत्व है जो वो बिक रहा है।


आज ही मिले कुछ नए मेसेज में बाबा रामदेव और आरएसएस को भी लपेट लिया है। फोटोशॉप से एडिट किये गए रामदेव मैग्गी के पैक whatsapp पर खूब भेजे जा रहे है जिस में मैग्गी के पैकेट पर बाबा राम की फोटो और आरएसएस द्वारा एप्रूव्ड की मोहर लगी है। इस मामले में बाबा रामदेव औरआरएसएस को बिना मतलब ही खींचा जा रहा है क्योंकि मैग्गी पर लगे बैन पर इनका कोई हाथ नहीं है।

पता नहीं क्यों, लोग ये समझने को तैयार नहीं कि मैग्गी के सबसे ज्यादा उपभोक्ता उनके अपने बच्चे है और मैग्गी में मिला मोनोसोडियम ग्लूटामेट बच्चों की पाचन शक्ति को ख़राब करने के साथ साथ उन्हें जंक फ़ूड का आदी भी बना रहा है। जैसे एक नशेड़ी को नशे के सिवा कुछ नहीं सूझता बैसे ही जंक फ़ूड के आदी बच्चों का व्यवहार होता जा रहा है।
आज बच्चे घर के बने पौष्टिक खाना खाने को तैयार नहीं उन्हें तो सिर्फ मैग्गी, चाउमिन,बर्गर आदि ही चाहिए।

सब को पता है कि सिगरेट, गुटके सहेत के लिये हानिकारक है मगर उन्हें इस्तेमाल करने वाले तो वो समझदार लोग है जिन्हें अपनी सहेत की खुद ही चिंता नहीं तो दूसरा क्या करे।


इसीप्रकार दूध या अन्य खाद्य पदार्थो में हुई मिलावट को ले लीजिये, हम चाहते तो है कि हमें शुद्ध सामान मिले मगर हम इस मिलावट का विरोध करने के लिए तैयार नहीं। हमें दिख रहा है हलवाई का तेल बिलकुल फुका हुआ और गन्दा है या उसकी चाशनी में मक्खी मच्छर पड़े है फिर भी हम से उस से भठूरे, समोसे या जलेबी ले रहे है। हम मिलावटी दूध 40रुपये के हिसाब से खरीदने को तैयार है मगर 50 रुपये में मिलने वाले शुद्ध दूध की थैली नहीं खरीदेंगे।
मैग्गी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का बहुप्रचारित ब्रांड है इसके प्रचार प्रसार में जितने पैसे खर्च होते उतने तो इसे बनाने में भी खर्च नहीं होते और इसके प्रचार का एक मात्र टार्गेट है बच्चे। इस पे रोक देशहित से ज्यादा बच्चों के हित में है।
ये सब भारत की जगह किसी और देश में हुआ होता तो मैग्गी पर बैन के साथ इसे बनाने वाली nestle कंपनी पर कई मुकदमे हो गए होते मगर हमें क्या
हम भारतीय मैग्गी जरूर खायेंगे और स्वदेशी उत्पादों पर ऊँगली उठायेंगे।