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अपनी प्रेजेंटेशन स्किल्स सुधारें। How to improve Presentation skills.


कार्यस्थलों पर दी जाने वाली प्रेजेंटेशन व्यवसाय और कला का अनोखा मेल होती हैं। इनकी जरुरत किसी भी तरह की बहस से परे है। सच यह भी है कि अधिकांश लोगों में प्रेजेंटेशन स्किल्स की कमी होती है। प्रेजेंटेशन के महत्व और इससे जुडी कमियों को दूर करने के तरीके बता रहे हैं।

अधिकांश व्यक्तियों के लिए लोगों के बड़े या छोटे समूह के सामने बोलना बहुत मुश्किल होता है। अकसर ऐसा मौका आने पर लोग बचने की कोशिश करते हैं, परन्तु यदि सबके सामने या मंच पर खड़े होकर बोलना ही अंतिम विकल्प हो तो उनकी प्रेजेंटेशन गड़बड़ा जाती है।



दरअसल लोगों के सामने खड़े होकर, मध्दिम रोशनी में, स्क्रीन पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन देना किसी कला से कम नहीं है। उस समय सामने बैठे लोगों के आँखें और कान प्रेजेंटेशन देने वाले की ओर मुड़े हुए होते हैं। ऐसे में अपनी एकाग्रता बनाए रखने और विषय से न भटकते हुए बात को सफाई के साथ उन तक पहुंचा देने के लिए अच्छे-खासे अभ्यास की जरुरत होती है।



प्रेजेंटेशन देते हुए शुरुआत तो अच्छी होती है लेकिन बीच में अचानक किसी के द्वारा कोई सवाल पूंछे जाने पर प्रेजेंटेशन देने वाले की एकाग्रता भंग हो जाती है। सवाल का जवाब देने के बाद उसे अपनी लय टूटी हुई महसूस होती है। फिर शुरू होता है विषय से भटकने का दौर। कई बार तो यह भी याद नहीं रह पता कि सवाल पूछें जाने से पहले विषय के किस पक्ष के बारे में बात हो रही थी।इस हालत में कभी-कभी महसूस होता है कि प्रेजेंटेशन समाप्त हो चुकी है।

क्या उपाय किये जाने चाहिए ऐसी स्थिति में? वैसे तो इस स्थिति में कई स्तरों पर काम किया जाना चाहिए, लेकिन पहले से की गयी कुछ बुनियादी तैयारी से प्रेजेंटेशन स्किल्स में सुधार किया जा सकता है। बेहतर प्रेजेंटेशन के दो मुख्य पक्ष होते हैं – अच्छे तरीके से लिखा गया कंटेंट और उसे बोलने का प्रभावशाली तरीका। इसके आलावा भी कई तरीके हैं प्रेजेंटेशन में सुधार के।





अगर आपका कोई सवाल है तो आप बेजिझक हो कर पूंछ सकते हैं।


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एक बेहतर प्रजेंटर बने। Become a Good Presentor.

अकसर प्रेजेंटेशन के लिए कई बातों की जरुरत होती है। आपको अपने श्रोताओं की जरूरतों का अंदाजा होना चाहिए। आपके पास पहले से कोई रोचक, सम्पूर्ण और सबका ध्यान खींचने वाला कंटेंट होना चाहिए। साथ ही अपनी बात को सबके सामने रखने का आत्मविश्वास होना चाहिए। अपने माहौल की समझ के साथ-साथ आपको यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि आपके सन्देश का असर अधिक लोगों तक पहुँचे।




अपने श्रोताओं के बारे में जाने।


आपको सुनने वालों के बारे में सबसे पहले पता लगाना चाहिए की वे कौन हैं? इसके बाद यह जानना जरुरी होता है कि वे प्रेजेंटेशन से क्या चाहते हैं? उनके लिए क्या सूचना नयी होगी क्या पुरानी? क्या उनकी कुछ विशेष जरूरतें हैं, जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए? इसके लिए ये जरुरी है की आपको प्रेजेंटेशन की आउटलाइन स्पष्ट हो। दरअसल, आपको सुनने वाले यदि संतुष्ट रहते हैं तो समझिये आपकी प्रेजेंटेशन सफल रही।

 

अपने कंटेंट को तैयार करें।

 

वहीँ अपने कंटेंट को तैयार करना इस पर भी निर्भर करता है कि आप किस किस्म का प्रेजेंटेशन देने जा रहे हैं। फिर भी जरुरी हैं आप मुख्य बिन्दुओं की पहचान कर लें। यह जरुरी नहीं होता की श्रोताओं के सामने हर डिटेल रखी जाये। बेहतर प्रेजेंटेशन दर्शकों को विषय की अतिरिक्त जानकारी देती है, इसलिए जरुरी है कि विषय की आउटलाइन से शुरुआत की जाए। श्रोताओं को बताएँ की आप क्या विषय उठाना चाहते हैं, ताकि उनकी अपेक्षाएं शुरू में ही स्पष्ट हो जाए।इससे विषय के प्रति कौतुहल भी बना रहता है। एक अन्य तथ्य यह भी है कि प्रेजेंटेशन की शुरुआत और अंत जोरदार तरीके से हो। यदि शुरुआत में आप श्रोताओं का ध्यान नहीं खींच पाए तो यह आपके पक्ष में नहीं जाता। साथ ही बीच-बीच में रोचक उदाहरण देने भी जरुरी होते हैं।

 

बॉडी-लेंगुएज का ध्यान रखें

 

सबसे मजेदार कंटेंट बेअसर हो जाता है जब प्रजेंटर का स्टाइल उसके अनुरूप ना हो। कई लोग प्रेजेंटेशन के दौरान नुर्वस हो जाते हैं, जिसका असर उनके बोलने और बॉडी लैंग्वेज पर पड़ता है। यही कुछ रुकावटें हैं, जिन पर काबू पाना जरुरी होता है। आत्मविश्वास बढ़ने के साथ-साथ यह कमियां दूर हो जाती हैं और आत्मविश्वास बढाने के लिए अभ्यास, लचीलापन और कंटेंट की अच्छी जानकारी होना बेहद जरुरी होती हैं।




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