Tuesday, 28 April 2015

प्रेजेंटेशन को अच्छा बनाने के लिए क्या करें। What do make presentation well and better.

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एक अच्छी प्रेजेंटेशन में कई चीजें होनी चाहिए जिससे देखने वालों और श्रोताओं तक अपनी बात अच्छी तरह पहुंचाई जा सके। कुछ साधारण से बिन्दु हैं जिनसे आप अपनी प्रेजेंटेशन और अपनी प्रेजेंटेशन स्किल्स को अच्छा बना सकते हैं।



आकर्षक और मनोरंजक शैली

 

सबसे पहले ये याद रखें की आपकी प्रेजेंटेशन आकर्षक और मनोरंजक होनी चाहिए, भले ही वह वार्षिक लाभ-हानि के बारे में बताने वाली ही क्यों न हो। इसी के आधार पर आप सुनने वालों का ध्यान भी अपनी ओर खींच पाएंगे। पर इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप जरुरी बातें छोड़ कर लतीफे सुनाना शुरू कर दें। दरअसल आपको सुनने वाले आपसे कुछ उम्मीदें बांधे रखते हैं, जिन पर आपको अपनी शैली के जरिए खरा उतरना होता है। बिलकुल सपाट तरीके से, बिना हँसी-मजाक के अपनी बात रख देने से आप दर्शकों का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पाएंगे।



बॉडी लैंग्वेज/आई कांटेक्ट बना कर रखना

 

प्रेजेंटेशन के दौरान कांफ्रेंस रूम में मौजूद लोगों की आँखों में देखना सफलता की पहचान होती है। इस तारीके से आप दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए उनके साथ सीधा संपर्क स्थापित करते हैं।साथ ही आपको दर्शकों के सवालों का जवाब देने के लिए भी समय मिल जाता है। यदि आप अपनी ओर से कुछ प्रस्ताव रख रहें हैं तो इस मामले में यह भी सच है कि प्रेजेंटेशन देते समय आपका पूरा ध्यान केवल नीति-निर्माताओं की ओर ही नहीं होना चाहिए, उनके सहायक आदि भी अक्सर फैसले लेने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनकी ओर देखते हुए भी संबोधन बेहद जरुरी है।



प्रेजेंटेशन के उद्देश्य की स्पष्टा

 

अपने काम के प्रति उत्साह और प्रेजेंटेशन पूरा करने की जल्दी के कारण अक्सर मुंह से बेतरतीब शब्द निकल जाते हैं। इसलिए जब आपको लगे की आपकी रफ़्तार ज्यादा है तो उसे 50 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। असल में धीरे बोलने से सुनने वालों की समझ में आपकी हर बात आ जाती है और आपको अच्छे शब्दों को चुनने के लिए पूरा समय मिलाता है। धीरे बोलने से आप श्रोताओं के भाव-भंगिमाओं को भी परख सकते हैं और अपनी प्रेजेंटेशन की रणनीति में जरुरी बदलाव कर सकते हैं।



माहौल को समझें

 

किसी भी प्रेजेंटेशन के दौरान अपने काम को छोड़ कर बाहरी वातावरण पर आपका नियंत्रण नहीं होता।आपके सामने बैठे लोग अनजान भी हो सकते हैं, इसलिए जरुरी है कि प्रेजेंटेशन से पहले रूम में अभ्यास कर लें। इस दौरान यह जाँच लें कि क्या अपनी पावर पॉइंट फाइल तक आपकी पहुँच आसान है? क्या माइक्रोफोन की पहुँच वहां तक है जहाँ तक आप प्रेजेंटेशन के दौरान जा सकते हैं? क्या आप अपनी डेस्क को हिला-डुला सकते हैं? क्या आप जिस जगह खड़े होंगे वहां से आप सभी को और आपको सुनने वाले आपको देख सकते हैं? हालाँकि इसके आलावा भी कई और भी बातें हैं जो आपको ध्यान में रखनी होती हैं, लेकिन अभ्यास के दौरान सभी काम आप खुद करके देखें, किसी दुसरे को इसकी जिम्मेंदारी न दें। याद रखें प्रेजेंटेशन कोई डराने वाली प्रक्रिया नहीं होती और न ही जरुरत की द्रष्टि से यह ऐसी होती है, जिसे आप नजरंदाज कर सकें।



समय का ध्यान रखें

 

अभ्यास के दौरान आपको समय का अंदाजा हो जाता है। इस दौरान यह साफ़ हो जाता है कि प्रेजेंटेशन कितनी देर तक चलेगी और आपके सामने यह भी स्पष्ट हो जाता है कि बाद में स्टेटमेंट देने और लोगों के साथ बातचीत के लिए कितना समय बचेगा। लिहाजा जहाँ तक संभव हो, प्रेजेंटेशन रूम में ही अभ्यास करें। इस दौरान आपको प्रेजेंटेशन की समयावधि का भी ध्यान रखना चाहिए। अगर प्रेजेंटेशन के लिए 30 मिनट का समय मिलेगा तो अभ्यास 20-25 मिनट तक पूरा करने का प्रयास करें।इस तरह से आपको लोगों द्वारा पूंछें जाने वाले सवालों के लिए भी समय मिल जायेगा।

याद रखें, सामने बैठे लोग आपसे यह उम्मीद रखते हैं कि आप उनके समय का आदर करेंगें। यदि आप अपनी प्रेजेंटेशन जल्दी खत्म कर लेते हैं और उसमें कोई कमी भी नहीं रहती है तो इसका बड़ा सकारात्मक असर पड़ता है। इसके विपरीत अधिक समय लेने वाले अपने साथ-साथ लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बनाते हैं, इसलिए प्रेजेंटेशन सही समय और सही तरीके से समाप्त करने के अपने एजेंडा पर डटें रहें।




अगर आपका कोई सवाल है तो आप बेजिझक हो कर पूंछ सकते हैं।

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