Thursday, 9 April 2015

Don't fear failure so much. असफलता से इतना ना डरिये।

23:37



सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब भी कोई व्यक्ति कोई कार्य करता है तो उसे इन दो पहलुओं से होकर गुज़रना पड़ता है और इसका पता कार्य पूरा हो जाने के बाद ही पता चलता है कि आप सफल हुए या असफल।
कई लोगों पर असफलता का डर इतना हाबी हो जाता है कि किसी भी कम में हाथ डालने से पहले हिचकिचाते हैं। उनकी ज़ुबान पर एक ही बात रहती है कि मैं सफल हुँगा या नही, मैं ये नही कर सकता, ये बहुत कठिन है बगैराह बगैराह। ऐसे लोगो में जिंदगी भर ये मलाल रहता है की एक बार करके दो देखना था शायद हो जाता।
उनके दिमाग़ में ये भी चलता रहता है कि मैं ये कर लूँ, मैं वो कर, ऐसे लोग कुछ नही कर पाते। वे या तो परिजनों पर बोझ बन कर रह जाते हैं या फिर योजना के लिहाज से मामूली काम कर के पेट भरने की जुगाड़ देखते रहते हैं। वे जिधर भी जाते हैं उन्हें लगता है असफलता उनका इंतजार कर रही है और उनकी ये काल्पनिक असफलता उनको किसी भी ओर बडने नही देती।

  

अक्सर ऐसा होता है कि जो व्यक्ति असफलता के डर का शिकार होता है, वह अपनी योजनाएं अपने परिचितों तक को भी नही बता पाता। दरअसल ऐसे लोगो को लगता है कि अगर असफल हुए तो वे लोगो के बीच मज़ाक का पात्र बन जाएँगे.
   एक मशहूर शायर ने क्या खूब लिखा है:-
            क्‍यों डरें जिंदगी में क्या होगा।
            कुछ ना हुआ तो तजुर्बा ज़रूर होगा।।

इसलिए अगर आप हमेशा यही सोचते रहेंगे कि मैं कहीं असफल ना हो जाऊ तो यकीन मनिये कि आप कभी सफल नहीं होंगे, आप अपने डर को भगा कर पूरे मन के साथ अपने कम में लगिये और महनत करिये, फिर देखिए की आपको सफल होने से कोई नही रोक पाएगा।

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